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Home >> Core Resources >> Hindi Hindi Articles महिला आरक्षण बिल महिला आरक्षण बिल पर पैदा हुए गतिरोध को दूर करने के लिए वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी की अध्यक्षता में हुई सर्वदलीय बैठक बेनतीजा खत्म हो गई। सूत्रों के अनुसार महिला आरक्षण पर आम राय बनाने की कोशिश में हुई इस बैठक में कोई सर्वसम्मति नहीं बन सकी। हालांकि, सरकार ने सभी दलों को आश्वासन दिया है कि लोकसभा में बिल पेश करने से पहले इस पर चर्चा की जाएगी। इस बैठक में केन्द्रीय मंत्री पी चिदंबरम, रक्षा मंत्री एके एंटनी, रेल मंत्री ममता बनर्जी, कानून मंत्री वीरप्पा मोइली के अलावा जदयू सुप्रीमो शरद यादव, सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव और राजद नेता लालू यादव समेत कई नेता मौजूद थे। इससे पहले महिला आरक्षण विधेयक के मौजूदा स्वरूप के प्रबल विरोधी सपा के प्रमुख मुलायम सिंह यादव और राजद के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने साफ किया कि वे इस विधेयक को लेकर वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक के बावजूद अपने रूख पर कायम रहेंगे। इन
दोनों नेताओं
ने आज
सुबह सर्वदलीय
बैठक शुरू
होने से
पहले संवाददाताओं
से कहा
कि वे
इस विधेयक
के मौजूदा
स्वरूप से
सहमत नहीं
हैं और
उनके इस
रूख में
किसी तरह
के बदलाव
का कोई
सवाल नहीं
है। मुलायम
सिंह यादव
ने कहा
कि हम
महिलाओं के
लिए आरक्षण
के विरोधी
नहीं बल्कि
इस विधेयक
के मौजूदा
रूवरूप के
विरोधी है।
लालू यादव
ने कहा
कि हम
महिलाओं के
लिए आरक्षण
का विरोध
नहीं कर
रहे हैं
लेकिन हम
अपने पहले
के रूख
पर कायम
है कि
महिलाओं के
लिये आरक्षण
में ही
पिछड़ी, दलित
एवं अल्पसंख्यक
महिलाओं के
लिए आरक्षण
किया जाए। उल्लेखनीय
है कि
समाजवादी पार्टी
के अध्यक्ष
मुलायम सिंह
यादव. राष्ट्रीय
जनता दल
के अध्यक्ष
लालू प्रसाद
यादव और
जनता दल
के अध्यक्ष
शरद यादव
ने इस
विधेयक का
विरोध किया
है। इन
नेताओं ने
यह कह
कर विधेयक
का विरोध
किया था
कि इससे
सिर्फ ऊंची
जाति की
शिक्षित महिलाओं
को ही
लाभ होगा।
उन्होंने विधेयक
पर चर्चा
के लिए
सरकार से
सर्वदलीय बैठक
आयोजित करने
की मांग
की थी।
इन
नेताओं ने
पिछड़ा वर्ग
और मुस्लिम
महिलाओं के
लिए आरक्षण
के भीतर
आरक्षण प्रदान
करने की
मांग की
थी। इस
बीच कांग्रेस
प्रवक्ता और
महिला आरक्षण
विधेयक के
प्रारूप की
जांच कर
रहे संयुक्त
पैनल की
अध्यक्ष जयंती
नटराजन ने
कहा कि
केंद्र सरकार
इस विधेयक
को लोकसभा
में उसी
रूप में
पारित कराने
के लिए
प्रतिबद्ध है.
जिस रूप
में वह
राज्यसभा में
पारित हुआ
है। आरक्षण
के भीतर
आरक्षण प्रदान
करने का
कोई सवाल
ही नहीं
उठता।
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